ठहराव !


ज़िंदगी ✨❤
ठहराव की कश्ती 🕊️❤✨

कुछ पल ही तो मांगा है तुमसे ,
ठहराव की कश्ती पर सवार होने के लिए ,
याद कुछ नहीं आया !?
ये मैं , मैं कौन !?
मैं तुम्हारा मन,
सबसे मिलते हो,
सबसे बातें करते हो ,
पर खुद से कब मिलोगे ,
कब कुछ समय अपने आप के साथ बितायोगे,
कब ज़रा खुद में खुद को खोज पयोगे ,
कब ज़रा खुद से बातें करके शर्मा जयोगे,
ठहराव ज़रूरी है ज़िंदगी की नहीं ,
खुदके मन की ,
जब खुद से मिलना होगा ,
तभी जान पायोगे क्या है ,
वो एहसास फिर कुछ और ,
क्या है वो जीना ,
या कुछ और ,
बस ठहराव ज़रूरी है ,
दो पल की सही ,
पर जान लेना कि,
खुद में तुम कौन हो ,
क्या उद्देश्य है तुम्हारा,
बस पाते रहना , 
मुकाम , शोहरत, प्यार !?
या फिर सिर्फ दो बाहें फैलाके,
खुलकर जीवन को जीना ।

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